भारत पर अंग्रेजों का शासन भले ही ना हो लेकिन उनके विचारों के शासन अभी भी राज करते हैं, कई वर्षों तक भारतवर्ष पर राज करने के बावजूद भी कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि अंग्रेज अब हमारे देश में नहीं है लेकिन वह शायद यह नहीं जानते कि अंग्रेज भले ही हमारे देश में नहीं रहते हैं लेकिन उनके विचार अपने देश में जरूर राज करते हैं. हमारे देश की संस्कृति उतने अच्छे ढंग से नहीं चल रही है जितने ढंग से उसे चलना चाहिए. कही न कही अपने देश में गलत ज्ञान का pattern जाने अनजाने में चल ही रहा है जो desh के विकास के लिए कही से भी ठीक नहीं है।
तो इसके पीछे क्या कारण है=
desh ke back hone ke पीछे एक मात्र यही कारण है कि हमारे देश के युवकों को सही ज्ञान का मार्गदर्शन नहीं हो पा रहा है. और मार्गदर्शन होगा कैसे जिस चीज से सही ज्ञान मिलता था उसे ज्ञान को तो हटा दिया गया है श्री भगवत गीता ,पुराण और उपनिषद इतने अच्छे ज्ञान के स्रोत थे ki अगर उसे पढ़ा जाए तो वाकई में किसी अन्य किताब के फिर पढ़ने की जरूरत ही नहीं thi, कोई भी ब्यक्ति अच्छा जीवन फिर आराम से जी sakata tha , और फिर व्यवसाय वाले चीज़े भी आसानी से कर sakata tha , लेकिन अंग्रेजों ने आकर उन सब पवित्र किताबों को अपने षड्यंत्र और छल से खराब kar दिया और bhartiy prachin shasta gyaan खराब बताने का जो प्रचार है उसे घूम-घूम कर किया गया angrejo dwara, और तमाम तरह ke प्रूफ देकर यह बताया गया कि भारतीय संस्कृति में जो श्री भगवत गीता है पुराण है उपनिषद है और तमाम प्रकार के जो शास्त्र है वह ठीक नहीं है यह बहुत ही मामूली और time wasting चीज़े है, ishe padhana matalab apana anmol samay faltu byateet karane ke barabar hai ऐसा करके negative प्रचार किया गया और वह प्रचार आज तक कायम है.
अगर इंसान अपनी पढ़ाई के स्तर पर और ज्ञान के स्तर पर थोड़ा सा विचार करें तो उसे पता चलेगा कि जिस चीजों को वह खा रहा है वह वास्तव में बहुत ही गंदा और घटिया चीज है यहां पर खाने का मतलब है ज्ञान को खाना और ज्ञान को खाने का जो परिणाम है वह मात्र सांसारिक चीजों पर टिका है. खाने का मतलब भौतिक शिक्षा जो हमें स्कूलों और कॉलेज में मिलती है वह बहुत ही कम काम करती है , ज़िन्दगी में उससे आप बहुत करेंगे तो जीने- खाने और बिजनेस करने का जुगाड़ कर लेंगे , वह भी कर लेंगे, कर ही लेंगे इसका कोई गारंटी नहीं है,
जबकि अगर byakti ko keval अध्यात्म का hi ज्ञान रहे अर्थात श्री भगवत गीता का ही मात्रा ज्ञान रहे तो भी आप बहुत ही ज्यादा तरक्की कर लेंगे क्योंकि श्री भगवत गीता का ज्ञान समस्त शास्त्रों में अग्रणी माना जाता है. क्या करना चाहिए ?क्या नहीं करना चाहिए ? किस समय कौन सा डिसीजन लेना है ? इस तरह की तमाम बातों का अध्ययन आपको श्री भगवत गीता में मिलेगा.इस किताब के आगे दुनिया की सारी किताबें आपको धूमिल लगेगी या बहुत ही फालतू और मामूली लगने लगेंगे.
पहले के ऋषि परंपरा में ,इंसान को बचपन में खासकर के जब वह आठवीं साल से लेकर 15 साल की उम्र में जो अच्छी ज्ञान की चीज़े लोड कर लेता tha वह अच्छी chize विचार बनकर जीवन भर उनके साथ रहती थी .
यू कहे की वह ज्ञान एक पौधे की तरह होती है जो वृक्ष बनकर ता उम्र बढ़ती रहती थी , आज चीज़े वैसे ही है अगर छात्र ठीक ८ से 15 साल tak ki उम्र ke बिच अगर श्री भगवत गीता का ज्ञान प्राप्त कर le to बच्चों ka जीवन बहुत ही achcha हो jaayega , हमारे शास्त्र कहते हैं की सबसे पहले किसी को श्री भगवत गीता का ही ज्ञान प्राप्त करना चाहिए उसके बाद भी कोई आप संसारी किताबो ,कोर्सो आदि ko padhana chahte hai to padh sakate hai .
इसके अलावा धन प्राप्त करने वाले किताबें जैसे की फिजिक्स ,केमिस्ट्री ,मैथ, बायो इस तरह की किताबें भी आप श्रीमद भगवत गीता पढ़ने के बाद पढ़ सकते हैं लेकिन सबसे पहले श्री भगवत गीता का ज्ञान पढ़े क्योकि yah अत्यंत ही जरूरी है.
लेकिन कुछ लोगों ने इतना अफवाह फैला दिया है श्री भगवत गीता के बारे में की यह किताब ठीक नहीं है , यह सब khaali समय की बरबद्दी (time -waste ) है और इसी अपवाह को लोग सच मानकर श्री भगवत गीता का अध्ययन नहीं करते hai ।
शास्त्र में तो यह भी कहा गया कि श्री भगवत गीता का भले ही आप अध्ययन करें ना करें लेकिन इसे अपने घरों में तो रखना ही चाहिए शुद्धिकरण के लिए.
आपने तो देखा ही होगा की कोर्ट में जब शपथ ली जाती है तो श्री भगवत गीता की ही ली जाती है. तो कहने का मतलब यह चीज लाजवाब है अगर श्री रामसुख दास जी द्वारा लिखित साधक संजीवनी श्रीमद भगवत गीता ko padh liya jaay या फिर जयदयाल गोयंदुका का जी का लिखा श्रीमद् भागवत गीता पढ liya jaay to fir kya kahane hai. आपको fir surely hi असीम ज्ञान प्राप्त हो जाएगा . एक बार पढ़ कर तो देखिए खुद hi apako geeta ka postive असर समझ में आयेगा .
यूट्यूब के वीडियो से केवल आपको थोड़ी बहुत मोटी - मोटा जानकारी आपको मिल जायेगी लेकिन पूरी जानकारी नहीं मिलेगी. क्योंकि देखिए मन में जो विचार होते हैं ना वह बहुत सारे आते हैं लेकिन मन के सारे विचारों को मुख से बताना बिल्कुल नामुमकिन सा है अगर मन में 100% विचार आते हैं तो मुख से वह 20% ही निकलेंगे। लेकिन पूरे के पूरे विचारों को मुख से निकाल देना संभव नहीं है. अतः youtube के ऑडियो से पूरा ज्ञान प्राप्त करना आसान नहीं होगा। इसलिए किताबों का अध्ययन करें और जरूर जरूर से करें , अध्यन करेंगे तभी किताबों का असली मोल समझ में आएगा.
और ऐसा भी कहा जाता है कि इंसान को जब तक जीवन है तब तक अपने आप को स्टूडेंट मानकर ही ज्ञान प्राप्त करनी चाहिए. लोग तो कई वर्षों तक तप करते रहते हैं ताकि उन्हें ज्ञान प्राप्त हो जाए, तो आप खाते पीते आराम से दो-चार घटे तो पढ़ ही सकते हैं.
बिना बिना ज्ञान का इंसान पशु के समान है, और ज्ञान में भी उसे सार्थक और सर्वश्रेष्ठ ज्ञान होना jaruri hai.
और सर्वश्रेष्ठ धर्मज्ञान में सबसे अच्छा ज्ञान श्री भगवत गीता को ही माना गया है. अतः साधक को श्री भगवत गीता जरूर से पढ़नी चाहिए.
किताब का नाम= साधक संजीवनी श्रीमद भगवत गीता
लेखक का नाम= राम सुखदास
publisher का नाम= गीताप्रेस गोरखपुर
किताब का नाम= श्रीमद् भगवत गीता
लेखक का नाम= जयदयाल गोविंदाका
publisher का नाम= गीताप्रेस गोरखपुर
इस पोस्ट में अभी और भी content लिखी जाएंगे अतः उन चीजों को पढ़ने के लिए आप laliajay.com पर निरंतर विजिट करते रहे और यह पोस्ट अगर आपको पसंद आता है तो इसे अपने सभी दोस्तों को फेसबुक ,व्हाट्सएप ,ट्विटर इत्यादि पर शेयर भी करें....
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